लक्ष्मी तरसही पाती-पाती बर- दूजराम साहू(Laxmi tarashu pati pati bar)

अब तक कुल देखे गये :
लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर
 


लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर,  पेरा ल काबर लेसत हो! 
चारा नई हे एसो बरीक दिन बर, केईसे नई सोचत हो !! 

हमर खाए बर किसम-किसम के, सोचो लक्ष्मी बर काए हावे न ! 
पेरा भुसा  कांदी चुनी झोड़ के,अउ काला लक्ष्मी खावे न!! 
धान लुआ गे धनहा खेत के, तहन ले पेरा ल  केईसे  लेसत हो ! 
लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर, पेरा ल काबर लेसत हो ! ! 

अभी सबो दिन बाचे हावे,जाड़काला में नंगत खवाथे न  ! 
चईत-बईसाख  खार जुच्छा रहिथे, कोठा में लक्ष्मी अघाथे न!! 
वो दिन तहन तरवा पकड़हू, अभी पेरा ल काबर फेकत हो ! 
लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर, पेरा ल काबर लेसत  हो !! 

काय फायदा तुमला होवत हे जी ,पेरा के आगी जलाये म ! 
एक मुठा राख नई मिले, कोल्लर भर पेरा भुर्री धराये म!! 
अपने सुवारथ के नशा म, लक्ष्मी ल काबर घसेटत हो! 
लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर, पेरा ल काबर लेसत हो!! 

झन लेसव झन फेकव रे संगी,लक्ष्मी के चारा पेरा ल! 
जोर के खईरखाडार में लाओ, खेत के सबो पेरा ल!! 
अंकाल परे हे सबो जीव बर, येला काबर नई सरेखत हो! 
लक्ष्मी तरसही  पाती-पाती बर, पेरा ल काबर लेसत हो !! 



शब्दार्थ -  तरसही = तरसना, पाती=पत्ती, पेरा = पैरा, लेसना = जलाना, बरिक दिन = बारह माह,  किसम-किसम= अनेक प्रकार के, भुर्री= ऐसी आग जो छड़ भर में बुझ जाए,  कांदी =घास, जुच्छा = खाली , तरवा = सीर, खईरखाडार = गऊठान
सरेखना = मानना/समझना ! 


दूजराम-साहू
निवास-भरदाकला 
तहसील -खैरागढ़ 
जिला-राजनांदगांव (छ .ग. ) 
8103353799

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