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कुण्डलियां
कुण्डलियां
बैताली छंद
दोहा
जीवन का शाश्वत सत्य
आज का नेता
मेरी लाली लाली
अतीत
आज का भारत
हिन्दी की बिंदी में शान
मुझे तो जीना है
हर रोज़ मर रहा हूँ मैं
झुकेगा सर नहीं अपना
त्रिपदिक
जीवनामृत  मेरे   श्याम
ये रिश्ता क्या कहलाता है
बोझ
वाणी वन्दना
दोहा
गर हम कहते हैं
बापू
शहीद दिवस
दे  दी  हमें  आजादी
बापू
गांधी छाप
बापू जी
वन्देमातरम् गाऊँगा
यह ज्योति अखण्ड जलने दो
भारत मां के सपूत
अलबेला बचपन
वादे है वादों का क्या....
सुनो न सुनो न
ओ!तरु तात! सुन ले
मेरी तीन  माताएँ
बेटियाँ
सरस्वती वन्दना
माँ
माँ,..माँ,.महकाएँ
अंतरात्मा
लिखें
मैं हुँ वीर जवान
जंगली कौन
नज़र की नज़र से
हम कहाँ गुम हो गये
प्रेमपथ
सूना सूना लगता है
भजन
इस जहां से
युगल गीत
तुम्हारी यही बातें